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पंख

 मेरे उड़ने से वह दुखी हैं तो उन्हें खुशियां बांट देता हूं। और उनकी खुशी के खातिर अपने पंख काट लेता हूं  खुद ही थामें बैठा हूं औजार अपनी बर्बादी का । काट लू पंख या खींच दू डोर अपनी आजादी का।। दिया जो खंजर हमने उस वसीदें को,  तो उसने हमसे नाता तोड़ लिया। साथ ही साथ---  उसने पंख काट कर परिंदा को छोड़ दिया । जान भी ले ली और जिंदा छोड़ दिया ।। अरे जाना ही था, वह तो एक बहाने की तलाश में रुकी थी । काट लिए पंख मैंने खुद के , उसे रोकने के लिए  जो मेरे उड़ने से दुखी थी ।। फिर मैंने उससे कहा  सुख में ना सही दुख में जुड़ जाएंगे। तुम जहां कहोगे वहां मुड़ जाएंगे।। वादा करो तुम साथ निभाना का । हम पंख के बिना भी उड़ जाएंगे ।। फिर मैंने उसे अपने घर की कहानी बताई --- अच्छे बेटे और भाई का किरदार निभाना जरूरी है ।सपने बाद में पहले परिवार मजबूरी है।। सबके हिस्सों में आने के लिए मैंने अपने आप को कई भागों में बांट लिया है। आसमान में उड़ने के सपने देखने वाले उस लड़के ने अपने हाथों से अपने पंख को काट लिया है ।। फिर कुछ लोग मेरे बारे में कुछ बातें करते है और कहते हैं  पंख जो...

Golden dear

 हम सोने के हिरन नहीं हैं  हम पर तीर न ताना जाये  क्यों वन में हम भटक रहे हैं यह सच भी तो जाना जाये ! हमें समझना हो तो कोई  कृष्ण बाँसुरी अपनी छेड़े  हमें समझना हो तो कोई  उद्धव फिर बरसाना जाये ! हम नदियों के तट पर रहते  हमें नीर की प्यास नहीं है  घायल चरन, न इसका कारण मरीचिका को माना जाये !  बाहर भटक रहें हैं पर  भीतर कस्तूरी खोज रहे हैं  शायद इससे हरे भरे इस  जंगल का वीराना जाये !